08-05-20
ब्लॉग का यह अंक मेरी माताजी के लिए।
हिंदी मेरी मातृभाषा है पर अंग्रेजी व् गुजराती बहुल कार्य प्रणाली में हिंदी बहुत दूर चली गयी। इन दिनों मैं प्रयास कर रहा हूँ की हिंदी के नजदीक जा सकुं। इस प्रयास में कुछ हिंदी पत्रिकाएं और ब्लॉग लेखकों का आभारी हूँ. राजस्थान पत्रिका का भी साभार, इनके सभी प्रकाशन आसानी के साथ इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में उपलब्ध हैं। कुछ दिनों पहले मेरे पत्रकार भाई से बात करने पर यह भी समझ में आया की, अंग्रेजी कितनी भी कह लो या लिख लो हिंदी एवं अन्य सभी भारतीय भाषाओ के पाठक आपसे अनछुए ही रहेंगे।
अब हम मुद्दे पर आते है. लिखना तो डिजिटल क्रुएलटी पर था, पर मेरा शोध अभी अधूरा है. अधकचरा ब्लॉग लिखने में कुछ मजा नहीं हैं. कुछ लोगो से विचार विमर्श भी बाकी है. आप सभी से माफी चाहता हूँ , अगले सप्ताह तक इस पर विस्तार के साथ लिखूंगा।
इस अंक में कुछ बाते पुरानी, खासकर कोटा राजस्थान की । कोटा यांने की मेरे पिताजी की करम स्थली, वे १९६५ में २५० किलीमीटर पलायन कर जयपुर से कोटा आ गए , यहाँ पर उनके भविष्य का निर्माण हुआ भारत सरकार के एक उपक्रम में ।
बात 1963 की है, भारत सरकार पिछड़े प्रदेशो में उन्नत टेक्नोलॉजी के उपक्रम बनाना चाहा रही थी। उसी साल में आगे बढ़ते हुए एक कंपनी का गठन किया गया और उसकी फैक्ट्री के लिए के कोटा शहर को चुना गया। इस उपक्रम का नामकरण इसके उत्पादों के पीछे इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड किया गया. भारत वर्ष में बन रहे तमाम बिजली घरो के लिए यहाँ पर कण्ट्रोल इंस्ट्रूमेंटेशन बनाये जाने लगे। रूस के तकनीकी सहयोग से बनी इस फैक्ट्री को कुछ कोटा वासिओ ने रिक्शा फैक्ट्री का नाम भी दिया (रुस्सियन बोलने में मेहनत है)। ईर्ष्या में कुछ और नाम भी दिए गए, पर यह सभ्रांत लोगो का ब्लॉग है इसलिए हम चुप रहेंगे. मेरे पिताजी ने इस उपक्रम को एक ट्रेनी के तौर पर 1965 में ज्वाइन किया ।
भारत के कोने कोने से लोग आकर इस उपक्रम से जुड़ने लगे, फैक्ट्री के पास ही एक कॉलोनी का निर्माण किया गया और तीव्र गति से विस्तार कार्यक्रम आगे बड़ गया. कारवां बढ़ता गया और लोग जुड़ते गए, सभी तरह के सहयोगी काम धंधे को भी गति मिली और जल्दी ही कोटा आगे बढ़ने लगा. १९६१ में कोटा की जन स्नख्या ४,३५,५४३ जोकि १९७१ में बढ़कर ६,२१,295 तक पहुंच गयी. इसमें मेरे पिताजी और माताजी भी शामिल थे और मैं भी।
उपक्रम की गाड़ी चल निकली। पर्याप्त आर्डर और मार्जिन की वजह से उपक्रम में काम करने वाले अधिकारी व कार्मिक संभ्रात जीवन बसर कर पा थे। सोसिलिस्म का जमाना था, इंदिरा गाँधी तमाम चीजों में सरकारीकरण को बढ़ावा दे रही थी। बैंको का राष्ट्रीयकरण, प्रिवीपर्स की समाप्ति इसी दौर में हुई. हर किस्म की कम्युनिटी ओनरशिप वाली सुविधाएं बड़ाई जा रही थी और भारत जल्दी ही इंदिरा गाँधी को इलेक्शन भी जिताने वाला था । गूंगी गुड़िया को दुर्गा का रूप कहा जा रहा था, वर्तमान की तरह उस समय भी प्रतिष्ठित सरकार के खिलाफ कुछ बोलना देश द्रोह का लेबल दे सकता था।
IL ( इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड का शार्ट फॉर्म) भी कहा पीछे रहने वाला था, कर्मियों हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई गयी। बहुत बड़ी और प्लांड टाउनशिप में (बिलकुल आजकल की तरह की गेटएड कम्युनिटीज की तरह), हर तरह की सुविधाएं थी और और उससे बढ़ के सभी तरह की सुरक्षा भी थी. आप अपना पूरा जीवन टाउनशिप में निकल सकते थे , मंदिर . गुरुद्वारा , शॉपिंग सेण्टर, पिक्चर हॉल, क्लब, हॉस्पिटल, एक बहुत बड़ा क्रिकेट ग्राउंड, बास्केट बॉल कोर्ट, टेनिस कोर्स, टेबल टेनिस, ब्रिज के लिए टेबल व् रूम. ध्यान रखा जाये पूरे कोटा शहर में तब इस तरह की सुविधाएं नहीं थी. एक अपवाद था तो कोटा का मिलट्री एरिया जहा सुविधाएं IL से बढ़ कर थी ।
जीवन की गाड़ी सरपट दौड़ने लगी कोटा में आगे बढ़ने की होंडा होड़ चालू हो आयी। सरकारी इन्सेन्टिव्स की खातिर प्राइवेट सेक्टर ने भी कोटा में पैर जमा लिए. खाद, सीमेंट और सिंथेक्टिक यार्न के उद्योग समूह भी आ कर जम गए. पुराने और नए शहर के दरमियान उजाड़ जगह थी, जिससे ज्यादातर लोग रात में पार करना उचित नहीं समझते थे. कोटा की जीवनदायनी चम्बल पर बांध बन गए थे, जिससे पानी और बिजली दोनों की समस्या हद तक दूर की जा चुकी थी. भूगोल की किताबो में कोटा को अधोगिक नगरी का दर्जा भी मिल गया था. चंबल के तट पर विकास की लम्बी इन्निंग्स चालू हुई जो अभी तक रुकी नहीं है।
उस समय की IL की कुछ चीजों के मूल्य आज हॅसने योग्य है । टेनिस बॉल (१० रूपये ), सप्ताह में 1 पिक्चर (मुफ्त), स्कूल बस (१०-२० रूपये में) , कंपनी स्कूल फीस, जी हां स्कूल भी था (याद नहीं शयद फ्री ही था), कर्मियों के लिए कैंटीन में भोजन (८० पैसे) , चाय स्नैक्स इत्यादि (१० पैसे)
IL ने सबको एक मुस्तैद और मजबूत नीव दी जिस पर हम लोगो ने अपने भविष्य का निर्माण किया. १९७० का दशक जब ख़तम हुआ, तब IL अपनी बुलंदी पर था. कुछ गलत हो ही नहीं सकता था और निश्चिंता से गाड़ी आगे बाद रही थी. बहुत सारे प्राइवेट उधोग कर्मिओ ने कम्पटीशन में आने की कोशिश करी पर असफल रहे. हनीवेल इनमे सबसे बड़ा नाम था, टाटा के साथ कलाब्रेशन में यह भी IL को न हिला सका. टाउनशिप के हर चौराहे पर हसीं सुनी जा सकती थी, संतोष और शांति से जीवन चल रहा था. हा है भाई कुछ उधम भी होता रहता था पर काफी मनोरजक हुआ करता था और ज्यादातर थोड़े समय में खत्म हो जाता था.
बिना किसी लाग लपेट के IL ने एक इकोसिस्टम को जन्म दिया जहा पर कोई भी अपनी मेहनत से आगे बढ़ सकता था. तमाम कोटा के स्कूलों में अव्वल नंबर पर IL के बच्चे ही दिखते थे ( हा भाई हम जैसे न गुजरवार भी थे ). एक्सीलेंस शब्द का सही इस्तिमाल इस सिस्टम के लिए किया जा सकता है. कितने ही IIT ग्रेजुएट, पीएचडी, डॉक्टर , वकील, एंट्रेप्रेनुएर , कलाकार इस इकोसिस्टम से निकले.
हम सभी ने सहनशीलता , ईमानदारी और अपने से बड़ो का हमेश सामान करना IL में ही डेवेलप किया. सब लोग सबको जानते थे इसलिए कुछ भी ऐसा करना जो आपत्ति जनक हो नामुमकिन था. एक मायने में आप यह भी कह सकते हैं की IL वासी सिविलयन नहीं थे वे अपने आप को उसके ऊपर का ही मानते थे. इस का खामिजाना बाद में भुगता गया.
पर जैसा होता है हर सृजन के साथ उसके विनाश के बीज भी बो दिए जाते है. वक्त के साथ छीजत बड़ी और दम्भ ने भी जन्म लिया. इस के साथ IL का विकास रुक गया और धीरे धीरे सब बदलने लगा. यह कहानी लम्बी और दुखद है, सभी कुछ बचाया जा सकता था और सभी कुछ सुधारा जा सकता था. पर यह न हो पाया. आगे के अक में इसपर विस्तार से लिखूंगा. आप में से किसी का कुछ वर्तान्त या किस्सा आप बताना चाहे तो मुझे ईमेल करे. कुछ इस तरह से आगे के क्रमांक लिखूंगा १ ) IL का भव्य अनावरण २)खुशियां सभी और ३) IL बुलंदी पर ४) धरताल दिखने लगा ५) काले दिन ६) समय के अवशेस ७) IL का भविष्य
१९६४ में फैक्ट्री का अनावरण हुआ जिस्सके लिए राजस्थान सरकार ने जमीन दी. भारत सरकार ने कुछ रिटायर्ड आर्मी अधिकारियो को प्रभंधन के लिए नियुक्त किया. ( यह एक बहुत बड़ा कारण रहा IL के आगे बढ़ने में) . हर एक साल में अधिकारी और ट्रेनी वर्ग में लोगो को लिया गया . अच्छी ट्रेनिंग और माहौल में कंपनी ने सगज कदम आगे रखे. टाउनशिप के निर्माण से एक कल्चर का निर्माण शुरू हुआ जोकि मिलिटीअरी और सर्व धर्म सद्भावना का मिला जुला सार था. एक तरफ सविधान का आदर्शवाद था और दूसरी तरफ फ़ौज का अनुशासन. मजिले बनती गयी , आर्डर मिलते गए और IL अपने क्षेत्र में शीघ्रः ही मोनपोली बन गया. पॉवर सेक्टर में कुछ भी होना हो इंस्ट्रूमेंटेशन तो IL के होते थे.
IL में खेल कूद को बढ़ावा दिया और बहुत सारे खेलो के लिए टीम का गठन किया गया. आप अगर कुछ खेल सकते थे तो आप टीम में आ सकते थे. भारत सरकार के उपक्रमों में आपसी चैम्पियशिप में भी IL ने नाम कमाया. कितने ही फोटोएं आपको फेसबुक पर मिलेंगी इन क्षणो को सजोये हुए.
पर गलतिया होने लगी थी, होती भी क्यों न , आखिर कुछ नया करने पर कुछ तो गलत हो सकता है. इन गलतियों का असर कुछ १५-२० साल बाद देखने को मिला. क्या थी यह गलतियां और क्या यह सही में गलतियां ही थी या ये IL समाज के सृजन में हुई त्रुटिया थी. बहुत कंटोरवोरसीएल भी हो सकता है इनका लिखना. काफी विस्तार में सोचना होगा और लोगो से विचार भी करना होगा.
क्रमश
अगले महीने इस का २ पार्ट खुशिया सभी और.
इसमें हम कोटा एवं IL की ग्रोथ के आकड़े और बहुत सारे प्रासंगिक बातो पर गौर करेंगे. इसमें शामिल होगी कोटा में उस ज़माने की बास्केट बॉल प्रतिस्पर्धाए
आपका
चेतन
ब्लॉग का यह अंक मेरी माताजी के लिए।
हिंदी मेरी मातृभाषा है पर अंग्रेजी व् गुजराती बहुल कार्य प्रणाली में हिंदी बहुत दूर चली गयी। इन दिनों मैं प्रयास कर रहा हूँ की हिंदी के नजदीक जा सकुं। इस प्रयास में कुछ हिंदी पत्रिकाएं और ब्लॉग लेखकों का आभारी हूँ. राजस्थान पत्रिका का भी साभार, इनके सभी प्रकाशन आसानी के साथ इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में उपलब्ध हैं। कुछ दिनों पहले मेरे पत्रकार भाई से बात करने पर यह भी समझ में आया की, अंग्रेजी कितनी भी कह लो या लिख लो हिंदी एवं अन्य सभी भारतीय भाषाओ के पाठक आपसे अनछुए ही रहेंगे।
अब हम मुद्दे पर आते है. लिखना तो डिजिटल क्रुएलटी पर था, पर मेरा शोध अभी अधूरा है. अधकचरा ब्लॉग लिखने में कुछ मजा नहीं हैं. कुछ लोगो से विचार विमर्श भी बाकी है. आप सभी से माफी चाहता हूँ , अगले सप्ताह तक इस पर विस्तार के साथ लिखूंगा।
इस अंक में कुछ बाते पुरानी, खासकर कोटा राजस्थान की । कोटा यांने की मेरे पिताजी की करम स्थली, वे १९६५ में २५० किलीमीटर पलायन कर जयपुर से कोटा आ गए , यहाँ पर उनके भविष्य का निर्माण हुआ भारत सरकार के एक उपक्रम में ।
बात 1963 की है, भारत सरकार पिछड़े प्रदेशो में उन्नत टेक्नोलॉजी के उपक्रम बनाना चाहा रही थी। उसी साल में आगे बढ़ते हुए एक कंपनी का गठन किया गया और उसकी फैक्ट्री के लिए के कोटा शहर को चुना गया। इस उपक्रम का नामकरण इसके उत्पादों के पीछे इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड किया गया. भारत वर्ष में बन रहे तमाम बिजली घरो के लिए यहाँ पर कण्ट्रोल इंस्ट्रूमेंटेशन बनाये जाने लगे। रूस के तकनीकी सहयोग से बनी इस फैक्ट्री को कुछ कोटा वासिओ ने रिक्शा फैक्ट्री का नाम भी दिया (रुस्सियन बोलने में मेहनत है)। ईर्ष्या में कुछ और नाम भी दिए गए, पर यह सभ्रांत लोगो का ब्लॉग है इसलिए हम चुप रहेंगे. मेरे पिताजी ने इस उपक्रम को एक ट्रेनी के तौर पर 1965 में ज्वाइन किया ।
भारत के कोने कोने से लोग आकर इस उपक्रम से जुड़ने लगे, फैक्ट्री के पास ही एक कॉलोनी का निर्माण किया गया और तीव्र गति से विस्तार कार्यक्रम आगे बड़ गया. कारवां बढ़ता गया और लोग जुड़ते गए, सभी तरह के सहयोगी काम धंधे को भी गति मिली और जल्दी ही कोटा आगे बढ़ने लगा. १९६१ में कोटा की जन स्नख्या ४,३५,५४३ जोकि १९७१ में बढ़कर ६,२१,295 तक पहुंच गयी. इसमें मेरे पिताजी और माताजी भी शामिल थे और मैं भी।
उपक्रम की गाड़ी चल निकली। पर्याप्त आर्डर और मार्जिन की वजह से उपक्रम में काम करने वाले अधिकारी व कार्मिक संभ्रात जीवन बसर कर पा थे। सोसिलिस्म का जमाना था, इंदिरा गाँधी तमाम चीजों में सरकारीकरण को बढ़ावा दे रही थी। बैंको का राष्ट्रीयकरण, प्रिवीपर्स की समाप्ति इसी दौर में हुई. हर किस्म की कम्युनिटी ओनरशिप वाली सुविधाएं बड़ाई जा रही थी और भारत जल्दी ही इंदिरा गाँधी को इलेक्शन भी जिताने वाला था । गूंगी गुड़िया को दुर्गा का रूप कहा जा रहा था, वर्तमान की तरह उस समय भी प्रतिष्ठित सरकार के खिलाफ कुछ बोलना देश द्रोह का लेबल दे सकता था।
IL ( इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड का शार्ट फॉर्म) भी कहा पीछे रहने वाला था, कर्मियों हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई गयी। बहुत बड़ी और प्लांड टाउनशिप में (बिलकुल आजकल की तरह की गेटएड कम्युनिटीज की तरह), हर तरह की सुविधाएं थी और और उससे बढ़ के सभी तरह की सुरक्षा भी थी. आप अपना पूरा जीवन टाउनशिप में निकल सकते थे , मंदिर . गुरुद्वारा , शॉपिंग सेण्टर, पिक्चर हॉल, क्लब, हॉस्पिटल, एक बहुत बड़ा क्रिकेट ग्राउंड, बास्केट बॉल कोर्ट, टेनिस कोर्स, टेबल टेनिस, ब्रिज के लिए टेबल व् रूम. ध्यान रखा जाये पूरे कोटा शहर में तब इस तरह की सुविधाएं नहीं थी. एक अपवाद था तो कोटा का मिलट्री एरिया जहा सुविधाएं IL से बढ़ कर थी ।
जीवन की गाड़ी सरपट दौड़ने लगी कोटा में आगे बढ़ने की होंडा होड़ चालू हो आयी। सरकारी इन्सेन्टिव्स की खातिर प्राइवेट सेक्टर ने भी कोटा में पैर जमा लिए. खाद, सीमेंट और सिंथेक्टिक यार्न के उद्योग समूह भी आ कर जम गए. पुराने और नए शहर के दरमियान उजाड़ जगह थी, जिससे ज्यादातर लोग रात में पार करना उचित नहीं समझते थे. कोटा की जीवनदायनी चम्बल पर बांध बन गए थे, जिससे पानी और बिजली दोनों की समस्या हद तक दूर की जा चुकी थी. भूगोल की किताबो में कोटा को अधोगिक नगरी का दर्जा भी मिल गया था. चंबल के तट पर विकास की लम्बी इन्निंग्स चालू हुई जो अभी तक रुकी नहीं है।
उस समय की IL की कुछ चीजों के मूल्य आज हॅसने योग्य है । टेनिस बॉल (१० रूपये ), सप्ताह में 1 पिक्चर (मुफ्त), स्कूल बस (१०-२० रूपये में) , कंपनी स्कूल फीस, जी हां स्कूल भी था (याद नहीं शयद फ्री ही था), कर्मियों के लिए कैंटीन में भोजन (८० पैसे) , चाय स्नैक्स इत्यादि (१० पैसे)
IL ने सबको एक मुस्तैद और मजबूत नीव दी जिस पर हम लोगो ने अपने भविष्य का निर्माण किया. १९७० का दशक जब ख़तम हुआ, तब IL अपनी बुलंदी पर था. कुछ गलत हो ही नहीं सकता था और निश्चिंता से गाड़ी आगे बाद रही थी. बहुत सारे प्राइवेट उधोग कर्मिओ ने कम्पटीशन में आने की कोशिश करी पर असफल रहे. हनीवेल इनमे सबसे बड़ा नाम था, टाटा के साथ कलाब्रेशन में यह भी IL को न हिला सका. टाउनशिप के हर चौराहे पर हसीं सुनी जा सकती थी, संतोष और शांति से जीवन चल रहा था. हा है भाई कुछ उधम भी होता रहता था पर काफी मनोरजक हुआ करता था और ज्यादातर थोड़े समय में खत्म हो जाता था.
बिना किसी लाग लपेट के IL ने एक इकोसिस्टम को जन्म दिया जहा पर कोई भी अपनी मेहनत से आगे बढ़ सकता था. तमाम कोटा के स्कूलों में अव्वल नंबर पर IL के बच्चे ही दिखते थे ( हा भाई हम जैसे न गुजरवार भी थे ). एक्सीलेंस शब्द का सही इस्तिमाल इस सिस्टम के लिए किया जा सकता है. कितने ही IIT ग्रेजुएट, पीएचडी, डॉक्टर , वकील, एंट्रेप्रेनुएर , कलाकार इस इकोसिस्टम से निकले.
हम सभी ने सहनशीलता , ईमानदारी और अपने से बड़ो का हमेश सामान करना IL में ही डेवेलप किया. सब लोग सबको जानते थे इसलिए कुछ भी ऐसा करना जो आपत्ति जनक हो नामुमकिन था. एक मायने में आप यह भी कह सकते हैं की IL वासी सिविलयन नहीं थे वे अपने आप को उसके ऊपर का ही मानते थे. इस का खामिजाना बाद में भुगता गया.
पर जैसा होता है हर सृजन के साथ उसके विनाश के बीज भी बो दिए जाते है. वक्त के साथ छीजत बड़ी और दम्भ ने भी जन्म लिया. इस के साथ IL का विकास रुक गया और धीरे धीरे सब बदलने लगा. यह कहानी लम्बी और दुखद है, सभी कुछ बचाया जा सकता था और सभी कुछ सुधारा जा सकता था. पर यह न हो पाया. आगे के अक में इसपर विस्तार से लिखूंगा. आप में से किसी का कुछ वर्तान्त या किस्सा आप बताना चाहे तो मुझे ईमेल करे. कुछ इस तरह से आगे के क्रमांक लिखूंगा १ ) IL का भव्य अनावरण २)खुशियां सभी और ३) IL बुलंदी पर ४) धरताल दिखने लगा ५) काले दिन ६) समय के अवशेस ७) IL का भविष्य
१) IL का भव्य अनावरण और विकास
बहुत संभव है की किसी दूरंदेशी ने अपने कार्य काल में इंस्ट्रूमेंटेशन को एक ज्वलंत जरुरत का दर्ज़ा दिया होगा. और यह भी संभव है की कोटा के ऊपर सारे सितारे जगमगा रहे होंगे, इसलिए इस फक्ट्री के लिए कोटा को चुना गया. यह भी हो सकता है की किसी अधिकारी ने रेलवे का मैप देखा होगा और सर्किल किया होगा की कितने शहर में दिल्ली से रात में बैठ कर सुबह पहुंच जा सकता है, जहा पर पानी भी हो और बिजली भी हो. आप आज भी देख लीजिये यह सब कोटा में ही मिलेगा (बिना किसी नाटक के). ये सब में इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मेरे पास इसका कोई ठोस कागजात या वर्तान्त नहीं है. खैर जब कोटा का नंबर लगना था तो लग गया.( अगर आपके पास कोई इनफार्मेशन हो तो जरूर बताईगा, यह हम सब की कहानी है)१९६४ में फैक्ट्री का अनावरण हुआ जिस्सके लिए राजस्थान सरकार ने जमीन दी. भारत सरकार ने कुछ रिटायर्ड आर्मी अधिकारियो को प्रभंधन के लिए नियुक्त किया. ( यह एक बहुत बड़ा कारण रहा IL के आगे बढ़ने में) . हर एक साल में अधिकारी और ट्रेनी वर्ग में लोगो को लिया गया . अच्छी ट्रेनिंग और माहौल में कंपनी ने सगज कदम आगे रखे. टाउनशिप के निर्माण से एक कल्चर का निर्माण शुरू हुआ जोकि मिलिटीअरी और सर्व धर्म सद्भावना का मिला जुला सार था. एक तरफ सविधान का आदर्शवाद था और दूसरी तरफ फ़ौज का अनुशासन. मजिले बनती गयी , आर्डर मिलते गए और IL अपने क्षेत्र में शीघ्रः ही मोनपोली बन गया. पॉवर सेक्टर में कुछ भी होना हो इंस्ट्रूमेंटेशन तो IL के होते थे.
IL में खेल कूद को बढ़ावा दिया और बहुत सारे खेलो के लिए टीम का गठन किया गया. आप अगर कुछ खेल सकते थे तो आप टीम में आ सकते थे. भारत सरकार के उपक्रमों में आपसी चैम्पियशिप में भी IL ने नाम कमाया. कितने ही फोटोएं आपको फेसबुक पर मिलेंगी इन क्षणो को सजोये हुए.
पर गलतिया होने लगी थी, होती भी क्यों न , आखिर कुछ नया करने पर कुछ तो गलत हो सकता है. इन गलतियों का असर कुछ १५-२० साल बाद देखने को मिला. क्या थी यह गलतियां और क्या यह सही में गलतियां ही थी या ये IL समाज के सृजन में हुई त्रुटिया थी. बहुत कंटोरवोरसीएल भी हो सकता है इनका लिखना. काफी विस्तार में सोचना होगा और लोगो से विचार भी करना होगा.
क्रमश
अगले महीने इस का २ पार्ट खुशिया सभी और.
इसमें हम कोटा एवं IL की ग्रोथ के आकड़े और बहुत सारे प्रासंगिक बातो पर गौर करेंगे. इसमें शामिल होगी कोटा में उस ज़माने की बास्केट बॉल प्रतिस्पर्धाए
आपका
चेतन
वैल डन चेतन 👏👏 आई एल के बारे में लिखने का बहुत सुन्दर विचार है।इस की बहुत जरूरत थी।क्योंकि इतनी सुखद स्थितियाँ दुखद कैसे हो गयीं?इतना विशाल वृक्ष कैसे भरभरा कर गिर गया ये कोई नहीं जानता।
ReplyDeleteThank you for your encouragement.
DeleteExcellent write up.
ReplyDeleteThank you, hope you will like the next few editions also
DeleteThank you for writing about our dear I L and bringing the golden era to life again. We had such an amazing childhood thanks to IL and as you mentioned the bubble we grew up in. Beautiful piece of writing. Congratulations!
ReplyDeleteThanks Munmun
DeleteThank you for your comments, yes we that was a golden phase of our life. Carefree and Bindaas. Look fw to seeing your comments on next part.
Hi Chetan,
ReplyDeleteHope you are doing well.
It has been a long time to see you.
Glad to read your article. Keep continue dear.
Girish Sharma.
27-D (My identity)
Hope you recognize me.
+917726922525 (Whatsapp No)
Thank you Girish, I am doing well. Hope you are hale & hearty too. Last we met was in Indore in 1994.
DeleteBahut hi badhiya!
ReplyDeleteDhanyawaad
DeleteBahut sundar lekh Chetan, We were one of the first few families who were part of IL, 63-B, My heart and soul belongs there, have seen it all.
ReplyDeleteKeep writing
Thank you for your encouragement, yes all of us some part of us still in IL.
DeleteGreat,
ReplyDeleteNostalgic moments re-lived.
Happy and proud that still i am part of Instrumentation Limited at Palakkad.
Awaiting your further series.
Will appreciate if you can email me the future posts.
PK Vasisht
Unit Head
Instrumentation Limited
Palakkad
Thanks will do.
DeleteFurther Chetan,
ReplyDeleteIl Kota is closed, but IL Palakkad Unit in Kerala is fully functional and doing well.
PK Vasisht
Next time I am in Kerala, i will come and meet you.
DeleteRds
बहुत ही बढ़िया लेखन
ReplyDeleteसंगीता राजपूत
125 B
I L